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मायावती का प्रहार – बसपा से निलंबित विधायकों को लेकर भ्रम फैला रही समाजवादी पार्टी

मायावती का प्रहार – बसपा से निलंबित विधायकों को लेकर भ्रम फैला रही समाजवादी पार्टी

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लखनऊ, 16 जून। उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने पार्टी से  निलंबित कुछ विधायकों के समाजवादी पार्टी में शामिल होने की अटकलों को लेकर तीखा प्रहार किया है। उन्होंने बुधवार को कई ट्वीट के जरिए कहा कि घृणित जोड़तोड़, द्वेष व जातिवाद आदि की संकीर्ण राजनीति में माहिर समाजवादी पार्टी द्वारा मीडिया के सहारे यह प्रचारित करना घोर छलावा है कि बसपा के कुछ विधायक टूट कर सपा में जा रहे हैं।

बसपा मुखिया ने कहा कि उन विधायकों को काफी पहले ही सपा व एक उद्योगपति से मिलीभगत के कारण राज्यसभा के चुनाव में एक दलित के बेटे को हराने के आराप में पार्टी से निलंबित किया जा चुका है।

निलंबित विधायकों को लेकर मायावती ने कहा कि सपा यदि इन निलंबित विधायकों के प्रति थोड़ी भी ईमानदार होती तो अब तक इन्हें अधर में नहीं रखती क्योंकि उन्हें यह मालूम है कि बसपा के यदि इन विधायकों को लिया तो सपा में बगावत व फूट पड़ेगी, जिसके कई विधायक बसपा में आने को आतुर बैठे हैं।

  • सदैव दलित विरोधी रहा है सपा का चाल, चरित्र व चेहरा

पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि सपा का चाल, चरित्र व चेहरा हमेशा ही दलित विरोधी रहा है, जिसमें थोड़ा भी सुधार के लिए वह कतई तैयार नहीं। इसी कारण सपा सरकार के कार्यकाल में बसपा सरकार के जनहित के कामों को बंद किया गया व खासकर भदोई को नया संत रविदास नगर जिला बनाने को भी बदल डाला, जो अति निंदनीय था।

  • पंचायत अध्यक्ष और ब्लॉक प्रमुख चुनाव के लिए पैंतरेबाजी

बसपा प्रमुख ने कहा कि पार्टी के निलंबित विधायकों से मिलने आदि का मीडिया में प्रचारित करने के लिए किया गया सपा का यह नया नाटक यूपी में पंचायत चुनाव के बाद अध्यक्ष व ब्लॉक प्रमुख के चुनाव के लिए की गई पैंतरेबाजी ज्यादा लगती है। हकीकत यह है कि यूपी में बसपा जन आकांक्षाओं की पार्टी बनकर उभरी है, जो जारी रहेगा।

गौरतलब है कि हाल ही में बसपा से निलंबित कुल नौ विधायकों ने अखिलेश यादव से मुलाकात की थी। ऐसे में अटकलें लगाई जा रही हैं कि विधानसभा चुनाव से पहले ये सभी समाजवादी पार्टी में शामिल हो सकते हैं। इस बीच सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव साफ तौर पर कह चुके हैं कि वह इस बार बसपा या कांग्रेस से गठबंधन नहीं करेंगे बल्कि बल्कि छोटे दलों के साथ चुनाव लड़ेंगे, जिसमें उनके चाचा शिवपाल यादव की भी पार्टी शामिल है।

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