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ओवैसी का भागवत पर पलटवार, बोले – आरएसएस के पास दिमाग जीरो और मुस्लिमों को लेकर नफरत 100%

ओवैसी का भागवत पर पलटवार, बोले – आरएसएस के पास दिमाग जीरो और मुस्लिमों को लेकर नफरत 100%

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हैदराबाद, 22 जुलाई। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुसलमीन (एआईएमआईएम) के अध्यक्ष और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत के उस बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया जाहिर की है, जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत को पाकिस्तान बनाने की कोशिश के लिए वर्ष 1930 से ही मुस्लिम आबादी को बढ़ाने की कोशिशें जारी हैं।

‘अगर सबका डीएनए एक तो फिर गिनती क्यों हो रही’ लोकसभा में लगातार चौथी बार हैदराबाद संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे ओवैसी ने गुरुवार को दो ट्वीट के जरिए आरएसएस प्रमुख पर यह पलटवार किया। उन्होंने पहले ट्वीट में लिखा, ‘आरएसएस के भागवत का कहना है कि 1930 से ही मुस्लिम आबादी को बढ़ाने की संगठित तरीके से कोशिश की गई। अगर सबका डीएनए एक ही है तो फिर गिनती क्यों हो रही है? दूसरी बात, 1950 से लेकर 2011 के बीच भारत में मुस्लिम आबादी की ग्रोथ रेट में कमी आई है। संघ के पास दिमाग जीरो है और मुस्लिमों को लेकर नफरत 100% है।’

भागवत ने गुवाहाटी में दिया था ये बयान

गौरतलब है कि भागवत ने बुधवार को गुवाहाटी में एक कार्यक्रम के दौरान कहा था, ‘1930 से ही संगठित तरीके से मुस्लिम आबादी को बढ़ाने की कोशिशें हुई हैं, ताकि उनकी ताकत को बढ़ाया जा सके। ऐसी कोशिश इसलिए हो रही ताकि इस देश को पाकिस्तान बनाया जा सके। ये सब पंजाब, सिंध, असम, बंगाल और आसपास के क्षेत्रों के लिए प्लान किया गया था, जिसमें कुछ हद तक सफलता भी मिली। हालांकि पंजाब, बंगाल आधा ही मिल सका, असम इन्हें नहीं मिल पाया। लेकिन अब भी कई तरह से प्रयास किए जा रहे हैं।’

आधुनिक भारत में हिन्दुत्व की कोई जगह नहीं होनी चाहिए

संसद से लेकर सड़क तक अपनी बेबाक टिप्पणियों के लिए चर्चित ओवैसी ने अपने दूसरे ट्वीट में लिखा, ‘मुस्लिमों से नफरत करने की संघ की आदत रही है और वो धीरे-धीरे समाज में यही जहर घोल रहा है। इस महीने की शुरुआत में भागवत ने कहा था हम सब एक हैं, जिसके बाद उनके समर्थकों ने उन्हें बहुत परेशान किया होगा। इसलिए उन्हें फिर से मुस्लिमों को नीचा दिखाने और झूठ बोलने की ओर लौटना पड़ा।’

अपने दूसरे ट्वीट की अंतिम लाइन में 52 वर्षीय एआईएमआईएम नेता ने यह भी कहा कि आधुनिक भारत में हिन्दुत्व की कोई जगह नहीं होनी चाहिए।

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